कृत्रिम मिठास जिंदगी में ला सकती कड़वाहट

शुगर फ्री च्युइंग गम, मिंट और टूथपेस्ट आदि में मिठास तो होती है, लेकिन ये मिठास लोगों की जिंदगी में कड़वाहट ला सकती है। यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि कृत्रिम मिठास के लिए चीनी की जगह जो जाइलिटोल का इस्तेमाल किया जाता है, वह हर्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

कृत्रिम मिठास जिंदगी में ला सकती कड़वाहट

शुगर फ्री च्युइंग गम, मिंट और टूथपेस्ट आदि में मिठास तो होत है, लेकिन ये मिठास लोगों की जिंदगी में कड़वाहट ला सकत है यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि कृत्रिम मिठास के लिए चीनी की जगह जो जाइलिटोल का इस्तेमाल किया जाता है, वह हर्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार जाइलिटॉल में हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ाने और प्लेटलेट की प्रतिक्रिया खून को गाढ़ा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि हृदय संबंधी बीमारियों वाले रोगियों पर इसका बुरा असर हो सकता है।

जाइलिटोल एक शुगर अल्कोहल है, जो विभिन्न फलों और सब्जियों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। पिछले एक दशक से इसका इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है। इसकी रासायनिक संरचना चीनी के समान है, लेकिन इसमें कम कैलोरी होती है। इस कारण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में यह काफी लोकप्रिय है। जाइलिटोल का उपयोग बेकरी के कम मीठे सामानों में भी किया जाता है।

अमेरिका की क्लीवलैंड क्लिनिक की स्टडी से पता चलता है कि जाइलिटोल वाले मीठे पेय के सेवन के तुरंत बाद थक्के जमने की घटना तेजी से बढ़ी है, लेकिन ग्लूकोज युक्त मीठे पेय के साथ ऐसा नहीं है। इस अंतर को समझाते हुए इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में न्यूरोलॉजी के निदेशक डॉ. एके साहनी ने कहा, यह जाइलिटोल के एक खास तरह के मेटाबॉलिक पाथवे के कारण होता है, जो प्लेटलेट फंक्शन और वस्कुलर रिस्पॉन्स को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है।

कृत्रिम चीजों के बजाय प्राकृतिक चीजों के उपयोग के कई लाभ हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सौंफ एक बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। ऐसा बदलाव करके लोग अपने समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।